आज़ादी

आज़ादी

आज़ादी

"आज़ादी क्या है ?"

आज का रक्त हूँ..
मै क्या लिखूँ आज़ादी पर ?
जो बह गया उस वक्त हो,
उनसे पूछो आज़ादी क्या है?
मै तो गा रहा, आज खुली हवाओं में,
जो लिख गया  गीत कोठरी में ,
उनसे पूछो आज़ादी क्या है?
मै तो बैठा महफूज़ छुपकर माँ के आचँल में,
जो छोड़ चले थे वो आँचल,
उनसे पूछो आज़ादी क्या है?
मुझे तो खौफ हर डगर ,
हर पल मौत का डर है।
जो लगा गये थे सीने से,
उनसे पूछो आज़ादी क्या है?
उड़ रही पतंगे ,
पड़े झूले पावन मौके पर हैं ,
जो झूल गए थे फंदे कभी
उनसे पूछो आज़ादी क्या है?
सजा तो दिए तिरंगे हमने
हर गली हर डगर पर ,
जो सिमट आया हो तिरंगे में
उनसे पूछो आज़ादी क्या है?
फिर बाँट दिया तिरंगा,
हमने तीन रंगों में,
जो कर गए थे एक सुर्ख कभी,
उनसे पूछो आज़ादी क्या है?
फिर बँट गया भारत भी
बेचारा दो अंगो में,
जो लड़ मरे थे भाई बन।
उनसे पूछो आज़ादी क्या है?
गिनायेंगे देश की कमियाँ
तुमको बहुत से ज़रूर ,
जो गिन गये थे साँसे खुद की,
उनसे पूछो आज़ादी क्या है?
अरे! हमें तो मिली आज़ादी
जैसे तोहफा मिला हो कोई,
जो छीन लाये थे मौत से
उनसे पूछो आज़ादी क्या है?

-नितांशी